कोयला एवं जल आधारित विद्युत गृहों से कम उत्पादन की स्थिति में संभावित विद्युत कमी से निपटने की तैयारी हेतु UPCL की समीक्षा
देहरादून। देश में वर्तमान विद्युत की मांग एवं उपलब्धता के बीच अंतर के कारण विशेषकर पीक आवर्स के दौरान कुछ क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है। विद्युत उपलब्धता में कमी के प्रमुख कारण राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आधारित विद्युत उत्पादन एवं पावर एक्सचेंजों से विद्युत की सीमित उपलब्धता, राज्य एवं केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम उत्पादन, टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयों का तकनीकी कारणों से बंद होना है। वर्तमान परिस्थिति में पावर एक्सचेंजों के माध्यम से पीक आवर्स के दौरान अतिरिक्त विद्युत की उपलब्धता अधिकतम दरों पर भी नहीं हो पा रही है। विगत कुछ दिनों से सायंकालीन पीक आवर्स के दौरान पावर ग्रिड की आवृत्ति लगभग 49.50 हर्ट्ज तक बनी हुई है। ग्रिड की सुरक्षा एवं स्थिरता को बनाए रखने के दृष्टिगत NRLDC (Northern Regional Load Despatch Centre) द्वारा निर्धारित सीमाओं के अनुसार ओवरड्रॉ की अनुमति भी प्रतिबंधित की जा रही है। वर्तमान में नदियों के जल प्रवाह में कमी के कारण जल विद्युत के विद्युत उत्पादन में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कमी दर्ज की जा रही है। सितंबर 2025 में इन दिनों पीक आवर्स के दौरान राज्य एवं केंद्रीय जल विद्युत गृहों से राज्य में औसतन लगभग 250 MW विद्युत उत्पादन में कमी देखी जा रही है। वर्तमान में टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से कार्यरत नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप पीक आवर्स के दौरान लगभग 100 MW की विद्युत क्षमता प्रभावित हो रही है।

उपरोक्त सभी परिस्थितियों के सम्मिलित प्रभाव के कारण वर्तमान में राज्य में पीक आवर्स के दौरान औसतन लगभग 350 MW विद्युत की कमी देखी जा रही है। विद्युत की उपलब्धता एवं मांग के बीच संतुलन बनाए रखने तथा ग्रिड की सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार कुछ क्षेत्रों में आपातकालीन विद्युत आपूर्ति में कटौती करनी पड़ रही है।
विद्युत की संभावित कमी की आशंका के दृष्टिगत प्रबन्ध निदेशक, UPCL द्वारा संबंधित अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा विद्युत कमी के कारणों से अवगत कराते हुए बताया गया कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की स्थिति अन्य समीपवर्ती राज्यों की अपेक्षा बेहतर है। इस पर प्रबन्ध निदेशक द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक सप्ताह के भीतर स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अनुरक्षण कार्यों के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि नवीन निर्माण एवं परियोजना संबंधी कार्यों के लिए पृथक से विद्युत बाधित न की जाए।
